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जनवरी, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्त्री और मीडिया

भारतीय मीडिया परिदृश्य मैं इन दिनों लगातार स्त्री छविओं का प्रयोग समाज के एक परिवर्तन विरोधी रूप को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है । आप जैसे ही टीवी चलते हैं आप हर चैनल पर एक न एक ऐसे धारावाहिक को देख पाएंगे जिस पर कोई न कोई स्त्री केन्द्रित कहानी चल रही होती है । इन कहानिओं का मूल स्वर तो स्त्री समर्थक लगता है पर वास्तव मैं यह सभी धारावाहिक स्त्री कि रक प्रतिगामी छवि को ही पोषित कर रहे होते हैं.