भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान २००८ प्रज्ञा को




वर्ष २००८ के भारतेंदु हरिश्चंद्रसम्मान समारोह में डा.प्रज्ञा को उनकी किताब तारा की अलवर यात्रा के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाज़ा गया.यह किताब २००८ में एन .सी .ई .आर.टी से प्रकाशित हुई .२९ मार्च २०१० को पुरस्कृत हुई। इस किताब की खासियत है की यह राजस्थान के अलवर शहर की सामाजिक ,इतिहासिक ,सांस्कृतिक, परिदृश्य के साथ सरिस्का के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के सवाल उठाती है।
डा.प्रज्ञा पिछले कई वर्षों से साहित्यिक सामाजिक लेखन में सक्रिय हैं । हिंदी के नुक्कड़ नाटकों पर उनकी किताब ' नुक्कड़ नाटक : रचना और प्रस्तुति वर्ष २००६ में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रकाशित हुई । यह किताब हिंदी में अपनी तरह का पहला प्रमाणिक प्रयास है । वर्ष २००८ में वाणी प्रकाशन ने उनके द्वारा सम्पादित १२ नुक्कड़ नाटकों का संग्रह ' जनता के बीच जनता की बात ' प्रकाशित किया । डॉ प्रज्ञा हिंदी प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों के जरिये हस्तक्षेप करती रही हैं। वर्तमान में दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में एसोसिअट प्रोफेसर हैं.

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